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भीष्म पर्व
अध्याय ५४
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सञ्जय़ उवाच
अद्य पाण्डुसुतान्सर्वान्ससैन्यान्सह वन्धुभिः |  ४२   क
मिषतो वारय़िष्यामि सर्वलोकस्य पश्यतः ||  ४२   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति