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द्रोण पर्व
अध्याय ५३
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अर्जुन उवाच
व्राह्मेणास्त्रेण चास्त्राणि हन्यमानानि संय़ुगे |  ४४   क
मय़ा द्रष्टासि सर्वेषां सैन्धवस्याभिरक्षिणाम् ||  ४४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति