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द्रोण पर्व
अध्याय ५३
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अर्जुन उवाच
यदि साध्याश्च रुद्राश्च वसवश्च सहाश्विनः |  ३४   क
मरुतश्च सहेन्द्रेण विश्वेदेवास्तथासुराः ||  ३४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति