अनुशासन पर्व  अध्याय ५२

भीष्म उवाच

सत्कृत्य स तथा विप्रमिदं वचनमव्रवीत् |  १६   क
भगवन्परवन्तौ स्वो व्रूहि किं करवावहे ||  १६   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति