आदि पर्व  अध्याय ५२

सूत उवाच

धृतराष्ट्रकुले जाताञ्शृणु नागान्यथातथम् |  १३   क
कीर्त्यमानान्मय़ा व्रह्मन्वातवेगान्विषोल्वणान् ||  १३   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति