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भीष्म पर्व
अध्याय ५१
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सञ्जय़ उवाच
यो यो हि समरे पार्थं पत्युद्याति विशां पते |  ३४   क
स स वै विशिखैस्तीक्ष्णैः परलोकाय़ नीय़ते ||  ३४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति