भीष्म पर्व  अध्याय ५०

सञ्जय़ उवाच

निजघान पदा कांश्चिदाक्षिप्यान्यानपोथय़त् |  ५८   क
खड्गेनान्यांश्च चिच्छेद नादेनान्यांश्च भीषय़न् ||  ५८   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति