भीष्म पर्व  अध्याय ५०

सञ्जय़ उवाच

तमापतन्तं वेगेन प्रेरितं निशितं शरम् |  २७   क
भीमसेनो द्विधा राजंश्चिच्छेद विपुलासिना |  २७   ख
उदक्रोशच्च संहृष्टस्त्रासय़ानो वरूथिनीम् ||  २७   ग
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति