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उद्योग पर्व
अध्याय ५०
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धृतराष्ट्र उवाच
जागर्मि रात्रय़ः सर्वा दीर्घमुष्णं च निःश्वसन् |  ३   क
भीतो वृकोदरात्तात सिंहात्पशुरिवावलः ||  ३   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति