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विराट पर्व
अध्याय ५०
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अर्जुन उवाच
कृपस्यैतद्रथानीकं प्रापय़स्वैतदेव माम् |  ५   क
एतस्य दर्शय़िष्यामि शीघ्रास्त्रं दृढधन्विनः ||  ५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति