कर्ण पर्व  अध्याय ५

धृतराष्ट्र उवाच

पलाय़मानः कृपणं दीनात्मा दीनपौरुषः |  ४६   क
कच्चिन्न निहतः सूत पुत्रो दुःशासनो मम ||  ४६   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति