सभा पर्व  अध्याय ५

नारद उवाच

कच्चिदात्मानमेवाग्रे विजित्य विजितेन्द्रिय़ः |  ५०   क
पराञ्जिगीषसे पार्थ प्रमत्तानजितेन्द्रिय़ान् ||  ५०   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति