उद्योग पर्व  अध्याय ४८

वैशम्पाय़न उवाच

नमस्कृत्वोपजग्मुस्ते लोकवृद्धं पितामहम् |  ४   क
परिवार्य च विश्वेशं पर्यासत दिवौकसः ||  ४   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति