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उद्योग पर्व
अध्याय ४८
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कर्ण उवाच
राज्ञो हि धृतराष्ट्रस्य सर्वं कार्यं प्रिय़ं मय़ा |  ३१   क
तथा दुर्योधनस्यापि स हि राज्ये समाहितः ||  ३१   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति