शान्ति पर्व  अध्याय ४८

युधिष्ठिर उवाच

महात्मना भगवता रामेण यदुपुङ्गव |  १२   क
कथमुत्सादितं क्षत्रं कथं वृद्धिं पुनर्गतम् ||  १२   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति