आदि पर्व  अध्याय ४७

सूत उवाच

ऋद्ध्या परमय़ा युक्तमिष्टं द्विजगणाय़ुतम् |  ११   क
प्रभूतधनधान्याढ्यमृत्विग्भिः सुनिवेशितम् ||  ११   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति