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वन पर्व
अध्याय ४६
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सञ्जय़ उवाच
मन्ये मन्युसमुद्धूताः पुत्राणां तव संय़ुगे |  ३१   क
अन्तं पार्थाः करिष्यन्ति वीर्यामर्षसमन्विताः ||  ३१   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति