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शल्य पर्व
अध्याय ४५
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वैशम्पाय़न उवाच
एतत्ते सर्वमाख्यातं यन्मां त्वं परिपृच्छसि |  ९५   क
यथाभिषिक्तो भगवान्स्कन्दो देवैः समागतैः ||  ९५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति