शल्य पर्व  अध्याय ४५

वैशम्पाय़न उवाच

उत्तेजनी जय़त्सेना कमलाक्ष्यथ शोभना |  ६   क
शत्रुञ्जय़ा तथा चैव क्रोधना शलभी खरी ||  ६   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति