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वन पर्व
अध्याय ४५
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वैशम्पाय़न उवाच
योऽसौ भूमिगतः श्रीमान्विष्णुर्मधुनिषूदनः |  २५   क
कपिलो नाम देवोऽसौ भगवानजितो हरिः ||  २५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति