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शल्य पर्व
अध्याय ४४
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वैशम्पाय़न उवाच
तुहनश्च तुहानश्च चित्रदेवश्च वीर्यवान् |  ६६   क
मधुरः सुप्रसादश्च किरीटी च महावलः ||  ६६   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति