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शल्य पर्व
अध्याय ४४
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वैशम्पाय़न उवाच
अभ्यषिञ्चन्कुमारं वै सम्प्रहृष्टा दिवौकसः |  १९   क
सेनापतिं महात्मानमसुराणां भय़ावहम् ||  १९   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति