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आश्रमवासिक पर्व
अध्याय ४४
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वैशम्पाय़न उवाच
शिवेन पश्य नः सर्वान्दुर्लभं दर्शनं तव |  ३५   क
भविष्यत्यम्व राजा हि तीव्रमारप्स्यते तपः ||  ३५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति