आदि पर्व  अध्याय ४४

सूत उवाच

भगवानिव देवेशः शूलपाणिर्हिरण्यदः |  २२   क
विवर्धमानः सर्वांस्तान्पन्नगानभ्यहर्षय़त् ||  २२   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति