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आश्रमवासिक पर्व
अध्याय ४३
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वैशम्पाय़न उवाच
विदुरश्च महाप्राज्ञो यय़ौ सिद्धिं तपोवलात् |  ३   क
धृतराष्ट्रः समासाद्य व्यासं चापि तपस्विनम् ||  ३   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति