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कर्ण पर्व
अध्याय ४२
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सञ्जय़ उवाच
द्रौणिस्तदपि राजेन्द्र भल्लैः क्षिप्रं महारथः |  ३६   क
चिच्छेद समरे वीरः क्षिप्रहस्तो दृढाय़ुधः |  ३६   ख
रथादनवरूढस्य तदद्भुतमिवाभवत् ||  ३६   ग
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति