अनुशासन पर्व  अध्याय ४१

भीष्म उवाच

स च घोरतपा धीमान्गुरुर्मे पापचेतसम् |  २४   क
दृष्ट्वा त्वां निर्दहेदद्य क्रोधदीप्तेन चक्षुषा ||  २४   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति