शान्ति पर्व  अध्याय ४०

वैशम्पाय़न उवाच

मुक्ता वीरक्षय़ादस्मात्सङ्ग्रामान्निहतद्विषः |  २१   क
क्षिप्रमुत्तरकालानि कुरु कार्याणि पाण्डव ||  २१   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति