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मौसल पर्व
अध्याय ४
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वैशम्पाय़न उवाच
आविध्याविध्य ते राजन्प्रक्षिपन्ति स्म यत्तृणम् |  ३९   क
तद्वज्रभूतं मुसलं व्यदृश्यत तदा दृढम् ||  ३९   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति