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मौसल पर्व
अध्याय ४
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वैशम्पाय़न उवाच
अलङ्काराश्च छत्रं च ध्वजाश्च कवचानि च |  २   क
ह्रिय़माणान्यदृश्यन्त रक्षोभिः सुभय़ानकैः ||  २   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति