आश्वमेधिक पर्व  अध्याय ४

व्यास उवाच

तेजसादित्यसदृशः क्षमय़ा पृथिवीसमः |  २०   क
वृहस्पतिसमो वुद्ध्या हिमवानिव सुस्थिरः ||  २०   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति