आश्रमवासिक पर्व  अध्याय ३९

व्यास उवाच

यच्च वो हृदि सर्वेषां दुःखमेनच्चिरं स्थितम् |  १७   क
तदद्य व्यपनेष्यामि परलोककृताद्भय़ात् ||  १७   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति