शान्ति पर्व  अध्याय ३९

वासुदेव उवाच

छन्द्यमानो वरेणाथ व्रह्मणा स पुनः पुनः |  ४०   क
अभय़ं सर्वभूतेभ्यो वरय़ामास भारत ||  ४०   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति