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उद्योग पर्व
अध्याय ३७
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विदुर उवाच
विश्वस्तस्यैति यो दारान्यश्चापि गुरुतल्पगः |  ११   क
वृषलीपतिर्द्विजो यश्च पानपश्चैव भारत ||  ११   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति