आदि पर्व  अध्याय ३७

सूत उवाच

स तमालक्ष्य पितरं शृङ्गी स्कन्धगतेन वै |  १६   क
शवेन भुजगेनासीद्भूय़ः क्रोधसमन्वितः ||  १६   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति