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शल्य पर्व
अध्याय ३६
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वैशम्पाय़न उवाच
तत्रस्थानृषिसङ्घांस्तानभिवाद्य हलाय़ुधः |  ३४   क
ततो रामोऽगमत्तीर्थमृषिभिः सेवितं महत् ||  ३४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति