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विराट पर्व
अध्याय ३६
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वैशम्पाय़न उवाच
अमरेष्विव देवेन्द्रो मानुषेषु धनञ्जय़ः |  ३२   क
एकः कोऽस्मानुपाय़ाय़ादन्यो लोके धनञ्जय़ात् ||  ३२   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति