आदि पर्व  अध्याय ३६

सूत उवाच

एवमुक्तस्तु धर्मात्मा शौनकः प्राहसत्तदा |  ५   क
उग्रश्रवसमामन्त्र्य उपपन्नमिति व्रुवन् ||  ५   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति