आदि पर्व  अध्याय ३६

सूत उवाच

स देवं परमीशानं सर्वभूतहिते रतम् |  २२   क
व्रह्माणमुपतस्थे वै काले काले सुसंय़तः |  २२   ख
स तेन समनुज्ञातो व्रह्मणा गृहमेय़िवान् ||  २२   ग
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति