आश्रमवासिक पर्व  अध्याय ३५

वैशम्पाय़न उवाच

महाप्रज्ञा वुद्धिमती देवी धर्मार्थदर्शिनी |  ५   क
आगमापाय़तत्त्वज्ञा कच्चिदेषा न शोचति ||  ५   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति