अनुशासन पर्व  अध्याय ३५

भीष्म उवाच

अशक्यं स्प्रष्टुमाकाशमचाल्यो हिमवान्गिरिः |  २०   क
अवार्या सेतुना गङ्गा दुर्जय़ा व्राह्मणा भुवि ||  २०   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति