शल्य पर्व  अध्याय ३४

वैशम्पाय़न उवाच

सरस्वतीं ततः सोमो जगाम ऋषिशासनात् |  ६९   क
प्रभासं परमं तीर्थं सरस्वत्या जगाम ह ||  ६९   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति