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शल्य पर्व
अध्याय ३४
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वैशम्पाय़न उवाच
दक्षस्य तनय़ा यास्ताः प्रादुरासन्विशां पते |  ४०   क
स सप्तविंशतिं कन्या दक्षः सोमाय़ वै ददौ ||  ४०   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति