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शल्य पर्व
अध्याय ३४
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वैशम्पाय़न उवाच
तीर्थानां विस्तरं राजन्गुणोत्पत्तिं च सर्वशः |  ३५   क
मय़ोच्यमानां शृणु वै पुण्यां राजेन्द्र कृत्स्नशः ||  ३५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति