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शान्ति पर्व
अध्याय ३४
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वैशम्पाय़न उवाच
आत्मनश्च विजानीहि निय़मव्रतशीलताम् |  ९   क
यदा त्वमीदृशं कर्म विधिनाक्रम्य कारितः ||  ९   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति