शान्ति पर्व  अध्याय ३३५

व्यास उवाच

रसां पुनः प्रविष्टश्च योगं परममास्थितः |  ५०   क
शैक्षं स्वरं समास्थाय़ ओमिति प्रासृजत्स्वरम् ||  ५०   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति