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शान्ति पर्व
अध्याय ३३४
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वैशम्पाय़न उवाच
एतत्तु महदाख्यानं श्रुत्वा पारिक्षितो नृपः |  ११   क
ततो यज्ञसमाप्त्यर्थं क्रिय़ाः सर्वाः समारभत् ||  ११   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति