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भीष्म पर्व
अध्याय ३३
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सञ्जय़ उवाच
इत्यर्जुनं वासुदेवस्तथोक्त्वा; स्वकं रूपं दर्शय़ामास भूय़ः |  ५०   क
आश्वासय़ामास च भीतमेनं; भूत्वा पुनः सौम्यवपुर्महात्मा ||  ५०   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति