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भीष्म पर्व
अध्याय ३३
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अर्जुन उवाच
पितासि लोकस्य चराचरस्य; त्वमस्य पूज्यश्च गुरुर्गरीय़ान् |  ४३   क
न त्वत्समोऽस्त्यभ्यधिकः कुतोऽन्यो; लोकत्रय़ेऽप्यप्रतिमप्रभाव ||  ४३   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति