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शान्ति पर्व
अध्याय ३२७
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वैशम्पाय़न उवाच
एष लोकगुरुर्व्रह्मा जगदादिकरः प्रभुः |  ६९   क
एष माता पिता चैव युष्माकं च पितामहः |  ६९   ख
मय़ानुशिष्टो भविता सर्वभूतवरप्रदः ||  ६९   ग
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति